वैश्वीकरण क्या है? (What is Globalization?)


वैश्वीकरण क्या है? (What is Globalization?)

वैश्वीकरण का अर्थ और परिभाषा (Meaning and Definitions)
वैश्वीकरण एक प्रक्रिया (Process) है, जबकि वैश्विकृत विश्व (Globalized World) लक्ष्य है, जिसे हासिल किया जाना है। साधारणत: यह एक आर्थिक संकल्पना है परंतु इसके राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक आयाम भी हैं। वैश्वीकरण आखिरकार क्या है? इसके प्रमुख घटक क्या है? इसके लिए वैश्वीकरण की कोई सार्वभौमिक एवं निश्चित परिभाषा नहीं है। सामान्य अर्थों में वैश्वीकरण से तात्पर्य भौगोलिक सीमाओं का न होना तथा भौगोलिक दूरियों की समाप्ति को माना जा सकता है। अर्थात् अलग-अलग देशों एवं व्यक्तियों से संबंधित विचारों, तकनीकों, संस्कृतियों तथा अर्थव्यवस्थाओं के बीच घटती दूरियां तथा अदान-प्रदान है।

वैश्वीकरण के कारण (Reasons Behind Globalization)

दुनिया के देशों और लोगों के बीच कम होते इस फासले के कई कारण है, जैसे कि:-
        विज्ञान एवं तकनीक का विकास
        देशो के बीच आपसी निर्भरता
        घटनाओं का विश्वव्यापी प्रभाव
        बड़े पैमाने पर उत्पादन एवं नये बाजारों की तलाश
        उत्पादन, औद्योगिक संरचना एवं प्रबंधन का लचीलापन
       अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थाए (विश्व बैंक, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष एवं विश्व व्यापार संगठन)


वैश्वीकरण का इतिहास (History of Globalization)

वैश्वीकरण की उत्पत्ति को लेकर कुछ विद्वानों का मत है कि वैश्वीकरण बीसवीं शताब्दी की देन है, किंतु हमें यह भी बात ध्यान रखनी चाहिए कि वैश्वीकरण अलादीन के चिराग के जिन की तरह अचानक से बीसवीं शताब्दी में उत्पन्न नहीं हुआ। बल्कि इसका स्वरूप तो प्राचीन काल से ही विकसित होता चला आ रहा है। इतिहासकार, साधु-महात्मा तथा राजा तब धन, शक्ति और ज्ञान की तलाश में नए-नए मार्गों की तलाश करते हुए दूर-दराज की यात्राएं करते थे। उदाहरण स्वरूप रेशम मार्ग जो चीन से लेकर यूरोप तक फैला हुआ था, दुनिया के एक बड़े भू-भाग को आपस में जोड़ता था और आर्थिक रूप से लोगों के जीवन को प्रभावित कर रहा था।
मध्यकाल में भी चंगेज खान तथा तैमूर लंग के साम्राज्य ने विश्व के एक बड़े भू-भाग को जोड़ा जिसे आधुनिक वैश्वीकरण का अल्पविकसित रूप माना जा सकता है। परंतु वास्तविक वैश्वीकरण की शुरुआत आधुनिक काल में विशेषकर औद्योगिक के बाद शुरू हुई। जिसने विश्व को समेटकर एक वैश्विक गांव (Global Village) का रूप देने की कोशिश की।
कुछ विद्वानों का मानना है कि प्रथम विश्व युद्ध से पूर्व वैश्वीकरण का नेतृत्व ब्रिटेन ने किया और दूसरे विश्व युद्ध के बाद उसका नेतृत्व अमेरिका ने किया। वैश्वीकरण शब्द का प्रचलन बीसवीं शताब्दी के अंतिम दो दशकों यानी 1980 एवं 1990 में जब शीत युद्ध का अंत और सोवियत संघ के बिखराव के बाद आम हो गया। इस प्रक्रिया में पूरे विश्व को एक वैश्विक गांव की संज्ञा दी जाती है। वैश्वीकरण के संदर्भ में अर्थशास्त्रियों का मानना है कि वैश्वीकरण के चार अंग होते हैं


अर्थशास्त्रियो के मतानुसार वैश्वीकरण के 4 अंग होते है...

      व्यापार-अवरोधों को कम करना जिससे उत्पादों एवं वस्तुओ का विभिन्न देशो के बीच बिना बाधा के आदान-प्रदान हो सके।
      ऐसी स्थिति का निर्माण करना, जिसमे विभिन्न देशो के बीच पूंजी/धन का स्वतंत्र प्रवाह हो सके।
      ऐसा वातारण कायम करना, जिसमे विभिन्न देशो के बीच तकनीक का मुक्त प्रवाह हो सके, और;

        ऐसा वातारण कायम करना, जिसमे विभिन्न देशो के बीच श्रम का निर्बाध प्रवाह हो सके।


इस प्रकार वैश्वीकरण के चार अंग होते हैं, किंतु विकसित देश अमेरिका एवं फ्रांस जैसे यूरोपीय देश वैश्वीकरण की परिभाषा पहले तीन अंगों तक ही सीमित कर देते हैं और अपने-अपने देशों में विकासशील और अविकसित देशों से आने वाले श्रमिकों पर कठोर वीजा नीति के माध्यम से कड़ा प्रतिबंध लगाते हैं। इस कारण से वैश्वीकरण की खूब आलोचनाएं भी होती है।
इस प्रकार हम कह सकते हैं कि विश्व स्तर पर आया खुलापन, आपसी मेल-जोल और परस्पर निर्भरता के विस्तार को ही वैश्वीकरण कहा जा सकता है।

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पढ़े सब बढे सब’
धन्यवाद
टीम माइलस्टोन
इस लैक्चर का यूट्यूब विडियो: https://youtu.be/5qkfbLu1M18




THE END



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